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वेदों से संग्रहीत शास्त्रों में से ज्योतिष शास्त्र एक है इसे वेदों का नेत्र भी कहते है | इसी शास्त्र का एक अंग है वास्तु शास्त्र  | यह शास्त्र मंगल्मय एवं शिल्पादि निर्माणों का आधार है | यह संसार के समस्त प्राणियों को समान रूप से श्रेय पहुचाने वाला शास्त्र  है | इसे प्रगति दायक निर्माण भी केह सकते है | यह कल्पनायो कि बजाए अनुभव को प्रधानता देने वाला एक अपूर्ण शास्त्र है | इस शास्त्र को श्रस्ति वैचित्र एवं मानव कल्याण के बीच कि कड़ी भी मान सकते है , क्यों कि दिशा मानव कि दशा को बदल सकती है |

वास्तु शास्त्र प्राचीन काल से है | लेकिन राजा महाराजायों तक ही सीमित होकर आम जनता तक पहुँच नही पाया , धीरे धीरे कयि परिवर्तन आए तानाशाही के स्थान में प्रजातंत्र का आविर्भाव हुआ शास्त्रिय अथवा तकनीकी प्रगति के कारण समाचार क्रांति आयी फलस्वरूप संपन्न लोगों तक ही सीमित रहने वाला वास्तु शास्त्र आम आदमी तक पहुँच गया |

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